ramnaamlekhan
Thursday, 8 February 2018
Tuesday, 23 May 2017
सच्ची बात !!
हर जीव में एक आत्मा का केंद्र बिंदु रहता है
पर कहाँ रहता है पता नहीं।
यही आत्मा जब तक
शरीर में रहती है तब तक जीव अपने शरीर को गतिमान बनाये रखते है शरीर जो भी गति करता
है वही जीव के कर्म होते है। कहते है की चौरासी लाख प्रकार के जीव जंतु है जो
जल में थल में निवास करते है
इन्ही में एक जीव इंसान भी है आत्मा जब भी एक शरीर को छोड़ कर दूसर शरीर में प्रवेश
करती है तो उस आत्मा के कर्म के हिसाब से उसे शरीर प्राप्त होता है उस आत्मा को एक
चींटी का शरीर भी मिल सकता है और हाथी का भी मिल सकता है सभी उसके कर्मो के हिसाब से
निर्धारित होता हो है।
Tuesday, 17 November 2015
Wednesday, 15 April 2015
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